अभी है उम्मीद

जिंदगी न मिलेगी दुबारा

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Lavanya Vilochan


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Hello world!

Posted On: 5 Oct, 2012  
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के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

के द्वारा: Lavanya Vilochan Lavanya Vilochan

के द्वारा: Lavanya Vilochan Lavanya Vilochan

परिवार में पहले हिंसा की शिकार मां हुआ करती थीं, अब बेटियां भी हो रही हैं.आंकड़े बताते हैं कि देश में पिछले दो दशकों में करीब 18 लाख बालिकाएं घरेलू हिंसा की शिकार हुई हैं.हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं के मुताबिक उन बालिकाओं की जान को खतरा बढ़ जाता है, जिनकी मां घरेलू हिंसा की शिकार होती रही हैं.जबकि ऐसा खतरा बालकों को नहीं होता.शोध के मुताबिक पति की हिंसा की शिकार औरतों की बच्चियों को पांच वर्षों तक सबसे ज्यादा खतरा होता है.हालांकि इसकी एक बड़ी वजह उपेक्षा भी है.लड़कियों के टीकाकरण तक में लापरवाही बरती जाती है.बीमारी में उनका इलाज तक नहीं कराया जाता. महिलाओं को न जाने कितने मोर्चों पर यंत्रणा झेलनी पड़ती है. महिलाएं अपने आपको सुरक्षित महसूस जिस दिन करेंगे , सच में उसी दिन महिला दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

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के द्वारा: arunsathi arunsathi

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के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: Lavanya Vilochan Lavanya Vilochan

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