अभी है उम्मीद

जिंदगी न मिलेगी दुबारा

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माँ

Posted On: 29 Mar, 2013 में

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motherजैसे गरमी के दिनों में लंबी सड़क पर चलते चलते

बरगद की छांव मिल जाये

ऐसी होती है माँ की गोद


चुप चाप बैठ कर घंटों रोने का मन करता है

बहुत से आंसू…जाने कब से इकट्ठे हो गए हैं

सारे बहा सकूं एक दिन शायद मैं

कई बार हो जाती है सारी दुनिया एक तरफ

और सैकड़ों सवालों में बेध देते हैं मन को

उस वक़्त तुम मेरी ढाल बनी हो माँ

आंसू भले तुम्हारी आँखों से बह रहे हो

उनका दर्द यहाँ मीलो दूर बैठ कर मैं महसूस करती हूँ

इसलिये हँस नहीं पाती हूँ


जिंदगी बिल्कुल ही बोझिल हो गयी है

साँसे चुभती हैं सीने में जैसे भूचाल सा आ जता है

और धुएँ की तरह उड़ जाने का मन करता है

कश पर कश…मेरे सामने वो धुआं उड़ाते रहते हैं

मैं उस धुंए में खुद को देखती हूँ

बिखरते हुये…सिमटते हुये


माँ…फिर वही राह है…वही सारे लोग हैं और वही जिंदगी

फिर से जिंदगी ने एक पेचीदा सवाल मेरे सामने फेंका है

तुम कहॉ हो


रात को जैसे bournvita बाना के देती थी

सुबह time पे उठा देती थी

मैं ऐसे ही थोड़े इस जगह पर पहुंची हूँ

मेरे exams में रात भर तुम भी तो जगी हो

मेरे रिजल्ट्स में मेरे साथ तुम भी तो घबरायी हो

पर हर बार माँ

तुमने मुझे विश्वास दिलाया है


कि मैं हासिल कर सकती हूँ…वो हर मंज़िल जिसपर मेरी नज़र है

और आज

आज जब मेरी आंखों की रौशनी जा रही है

मेरी सोच दायरों में बंधने लगी है

मेरी उड़ान सीमित हो गयी है

ये डरा हुआ मन हर पल तुमको ढूँढता है

तुम कहॉ हो माँ ?



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