अभी है उम्मीद

जिंदगी न मिलेगी दुबारा

21 Posts

40 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12850 postid : 11

5 साल बाद

Posted On: 26 Oct, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

indian-wedding-couple-photos_23181_600x450शादी के बाद


अभी शादी का पहला ही साल था,
ख़ुशी के मारे मेरा बुरा हाल था,
खुशियाँ कुछ यूं उमड़ रहीं थी,
की संभाले नही संभल रही थी..

सुबह सुबह मैडम का चाय ले कर आना
थोडा शरमाते हुये हमें नींद से जगाना,
वो प्यार भरा हाथ हमारे बालों में फिरना,
मुस्कुराते हुये कहना की…

डार्लिंग चाय तो पी लो,
जल्दी से रेडी हो जाओ,
आप को ऑफिस भी है जाना…

घरवाली भगवान का रुप ले कर आयी थी,
दिल और दिमाग पर पूरी तरह छाई थी,
सांस भी लेते थे तो नाम उसी का होता था,
इक पल भी दूर जीना दुश्वार होता था…


Read: पिता के पास लोरियाँ नही होती


शादी के 5 साल बाद


सुबह सुबह मैडम का चाय ले कर आना,
टेबल पर रख कर जोर से चिल्लाना,
आज ऑफिस जाओ तो मुन्ना को
स्कूल छोड़ते हुए जाना…

सुनो एक बार फिर वोही आवाज आयी,
क्या बात है अभी तक छोड़ी नही चारपाई,
अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना,
मुन्ना की टीचर्स को फिर खुद ही संभाल लेना…

ना जाने घरवाली कैसा रुप ले कर आयी थी,
दिल और दिमाग पर काली घटा छाई थी,
सांस भी लेते हैं तो उन्ही का ख़याल होता है,
अब हर समय जेहन में एक ही सवाल होता है…

क्या कभी वो दिन लौट के आएंगे,
हम एक बार फिर कुंवारे हो जायेंगे…. …!




Tags:                                               

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

6 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
October 30, 2012

ना जाने घरवाली कैसा रुप ले कर आयी थी, दिल और दिमाग पर काली घटा छाई थी, सांस भी लेते हैं तो उन्ही का ख़याल होता है, अब हर समय जेहन में एक ही सवाल होता है… क्या कभी वो दिन लौट के आएंगे, हम एक बार फिर कुंवारे हो जायेंगे…. …! हमारा तो यही हाल चल रहा है ! बढ़िया व्यंग्य

    Lavanya Vilochan के द्वारा
    October 30, 2012

    धन्यवाद , yogi sarswat ji

yatindranathchaturvedi के द्वारा
October 29, 2012

सराहनीय

    Lavanya Vilochan के द्वारा
    October 30, 2012

    धन्यवाद , yatindranathchaturvedi ji………

Santlal Karun के द्वारा
October 26, 2012

अच्छी कविता, व्यंग्यार्थ, प्रभावी; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    Lavanya Vilochan के द्वारा
    October 29, 2012

    धन्यवाद , Santlal Karun ji इसी तरह मेरी रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहिएगा ……………..


topic of the week



latest from jagran