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जिंदगी न मिलेगी दुबारा

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प्यार जिन्दगी है: एक प्यारी सी प्रेम कविता

Posted On: 6 Oct, 2012 में

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वो पुछती है ,

मैं उससे इतना प्यार  क्यों करता हूँ ? ?


LOVE POEM IN HINDIमैंने कहा एक तमन्ना हैं

तुम्हें पाने की. . . . .

वो कहती है ,

हर वक्त उदास क्यों रहते हो ? ?


मैनें कहा कोशिश है

तुम्हें हर खुशी दिलाने की. . . . .

वो कहती है ,

हर वक्त सोचते क्यों रहते हो ? ?


मैनें कहा आदत हो गई है

तुम्हें ख्यालों में अपना बनाने की . . . . .

वो कहती है ,

मैं न मिली तो ? ?


मैनें कहा तो तम्मना है

ये जिन्दगी मिटाने की. . . . .

वो कहती है ,

तुम्हें क्या मिलेगा मर कर ? ?


मैनें कहा एक उम्मीद ,

अगले जन्म में तुम्हें अपना बनाने की . . . . .


Tag: Love, Poem, Love Poem, Love Kavita, Love Poem in Hindi, Love Kavita in Hindi, प्रेम, प्यार, प्यार की कविता, हिन्दी कविता, Poem in Hindi

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 29, 2012

बहुत अद्भुत अहसास…सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको . मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद . सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला –

    Lavanya Vilochan के द्वारा
    October 30, 2012

    धन्यवाद , मदन मोहन जी……..

Mohinder Kumar के द्वारा
October 9, 2012

लावण्या जी, सच्चे प्रेमी के मन के यही भाव रहते हैं.. खुद को मिटा कर भी दूसरे की खुशी का मान रखना…. भाव भरी रचना के लिये बधाई… लिखते रहिये

    Lavanya Vilochan के द्वारा
    October 9, 2012

    धन्यवाद ,Mohinder kumar ji ..

Dhavlima Bhishmbala के द्वारा
October 8, 2012

लावण्य जी, आपकी कविता कि सादगी और प्रेम कि अदभुत सरल भाव मुझे बहुत पसंद आया | बधाई स्वीकार करे |

    Lavanya Vilochan के द्वारा
    October 9, 2012

    धन्यवाद, Dhavlima Bhishmbala ji

ashishgonda के द्वारा
October 8, 2012

मित्र! सुस्वागतम सुन्दर प्रस्तुति, जरा मेरी भी “एक अधूरी प्रेम-कथा” पढ़े- http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/10/08/%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE/

    Lavanya Vilochan के द्वारा
    October 9, 2012

    धन्यवाद, ashishgonda ji


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